Showing posts with label Poems. Show all posts
Showing posts with label Poems. Show all posts

29 June 2014

सूरज को नही डूबने दूंगा

अब मै सूरज को नही डूबने दूंगा
देखो मैने कंधे चौडे कर लिये हैं
मुट्ठियाँ मजबूत कर ली हैं
और ढलान पर एडियाँ जमाकर
खडा होना मैने सीख लिया है
घबराओ मत
मै क्षितिज पर जा रहा हूँ
सूरज ठीक जब पहाडी से लुढकने लगेगा
मै कंधे अडा दूंगा
देखना वह वहीं ठहरा होगा
अब मै सूरज को नही डूबने दूंगा
मैने सुना है उसके रथ मे तुम हो
तुम्हे मै उतार लाना चाहता हूं
तुम जो स्वाधीनता की प्रतिमा हो
तुम जो साहस की मुर्ति हो
तुम जो धरती का सुख हो
तुम जो कालातीत प्यार हो
तुम जो मेरी धमनी का प्रवाह हो
तुम जो मेरी चेतना का विस्तार हो
तुम्हे मै उस रथ से उतार लाना चाहता हूं
रथ के घोडे
आग उगलते रहें
अब पहिये टस से मस नही होंगे
मैने अपने कंधे चौडे कर लिये है।
कौन रोकेगा तुम्हें
मैने धरती बडी कर ली है
अन्न की सुनहरी बालियों से
मै तुम्हे सजाऊँगा
मैने सीना खोल लिया है
प्यार के गीतो मे मै तुम्हे गाऊंगा
मैने दृष्टि बडी कर ली है
हर आखों मे तुम्हे सपनों सा फहराऊंगा
सूरज जायेगा भी तो कहाँ
उसे यहीं रहना होगा
यहीं हमारी सांसों मे
हमारी रगों मे
हमारे संकल्पों मे
हमारे रतजगो मे
तुम उदास मत होओ
अब मै किसी भी सूरज को
नही डूबने दूंगा

- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना (Sarveshwar Dayal Saxena)

है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था
भावना के हाथ ने जिसमें वितानों को तना था
स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा
स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना था
ढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर, कंकड़ों को
एक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है
बादलों के अश्रु से धोया गया नभ-नील नीलम
का बनाया था गया मधुपात्र मनमोहक, मनोरम
प्रथम ऊषा की किरण की लालिमा-सी लाल मदिरा
थी उसी में चमचमाती नव घनों में चंचला सम
वह अगर टूटा मिलाकर हाथ की दोनों हथेली
एक निर्मल स्रोत से तृष्णा बुझाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है
क्या घड़ी थी, एक भी चिंता नहीं थी पास आई
कालिमा तो दूर, छाया भी पलक पर थी न छाई
आँख से मस्ती झपकती, बात से मस्ती टपकती
थी हँसी ऐसी जिसे सुन बादलों ने शर्म खाई
वह गई तो ले गई उल्लास के आधार, माना
पर अथिरता पर समय की मुसकराना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है
हाय, वे उन्माद के झोंके कि जिनमें राग जागा
वैभवों से फेर आँखें गान का वरदान माँगा
एक अंतर से ध्वनित हों दूसरे में जो निरंतर
भर दिया अंबर-अवनि को मत्तता के गीत गा-गा
अंत उनका हो गया तो मन बहलने के लिए ही
ले अधूरी पंक्ति कोई गुनगुनाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है
हाय, वे साथी कि चुंबक लौह-से जो पास आए
पास क्या आए, हृदय के बीच ही गोया समाए
दिन कटे ऐसे कि कोई तार वीणा के मिलाकर
एक मीठा और प्यारा ज़िन्दगी का गीत गाए
वे गए तो सोचकर यह लौटने वाले नहीं वे
खोज मन का मीत कोई लौ लगाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है
क्या हवाएँ थीं कि उजड़ा प्यार का वह आशियाना
कुछ न आया काम तेरा शोर करना, गुल मचाना
नाश की उन शक्तियों के साथ चलता ज़ोर किसका
किंतु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना
जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से
पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

- Harivansh Rai Bachchan

आग जलती रहे

एक तीखी आँच ने
इस जन्म का हर पल छुआ,
आता हुआ दिन छुआ
हाथों से गुजरता कल छुआ
हर बीज, अँकुआ, पेड़-पौधा,
फूल-पत्ती, फल छुआ
जो मुझे छुने चली
हर उस हवा का आँचल छुआ
... प्रहर कोई भी नहीं बीता अछुता
आग के संपर्क से
दिवस, मासों और वर्षों के कड़ाहों में
मैं उबलता रहा पानी-सा
परे हर तर्क से
एक चौथाई उमर
यों खौलते बीती बिना अवकाश
सुख कहाँ
यों भाप बन-बन कर चुका,
रीता, भटकता
छानता आकाश
आह! कैसा कठिन
... कैसा पोच मेरा भाग!
आग चारों और मेरे
आग केवल भाग!
सुख नहीं यों खौलने में सुख नहीं कोई,
पर अभी जागी नहीं वह चेतना सोई,
वह, समय की प्रतीक्षा में है, जगेगी आप
ज्यों कि लहराती हुई ढकने उठाती भाप!
अभी तो यह आग जलती रहे, जलती रहे
जिंदगी यों ही कड़ाहों में उबलती रहे ।


- दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar)

yeh bhi koi baat hain..


Pal bhar mein humko jaan liya, 
ek baat par bura maan liya,
Pyar mein zaruri hain thodi si nok jhok bhi,
tumne kaha, maine maan liya, yeh bhi koi baat hain,

Zindagi beet jaati hain sach ki talaash mein,
kisi se poocha aur jaan liya, yeh bhi koi baat hain

Rishto ka takaaza hain, len-den chalti rahe,
ehsaan par ehsaan liya, yeh bhi koi baat hain,

Gar ek zabaan hain, toh baat bhi ek hi ho,
mukar gaye phir thaan liya, yeh bhi koi baat hain,

Angutha na sahi kuch paise hi de dete
muft me humse gyaan liya, yeh bhi koi baat hain.



27 June 2014

क्या पता किधर जाऊँ ?

कभी बन के बूँद पानी की बादलों से गिरती हूँ ।
कांपती हूँ, डरती हूँ, यूं ही सहमी फिरती हूँ ।
क्या पता किधर जाऊँ ?
सोख ले मिझे माटी या नहर में घुल जाऊँ ।
काश! ऐसा भी हो कि सीप कोई खाली हो
एक बूँद बन के भी मोती में बदल जाऊँ !
हमने कब माँगा तुमसे , मेरी मोहब्बत का हिसाब 
दर्द वाली किस्तें देते रहो , मोहब्बत बढती जायेगी

25 June 2014

Jahan yaad na aaye teri,


Jahan yaad na aaye teri,
Woh tanhaai kis kaam ki.
Bigde rishte na bane,
To khudaai kis kaam ki.
Beshak apni manzil tak jana hai hamein,
Lekin jahaan se apne na dikhein,
Woh unchaai kis kaam ki!



Yeh bhi ek dua hai khuda se,
Kisi ka dil na dukhe hamari wajah se,
Aye khuda kar de kuchh aisi inaayat hum pe,
Ki khushiyan hi milein sabko hmari wjah se.










 Utha hua har hath dua ke liye nahi hota,
Jhuka hua har parda hawa ke liye nahi hota,
Apni galtiyon se bhi chirag bhuj jate hai aksar,
Kasoor hawa ka har baar nahi hota…

24 June 2014

है जहाँ मधुवन वहीं पर रास है..

चल हवा, उस ओर मेरे साथ चल
चल जहाँ मेरा अमर विश्वास है आत्माओं में मिलन की प्यास है
आज तक का तो यही इतिहास है, है जहाँ मधुवन वहीं पर रास है
मिल गया जिसको कि कान्हा का पता, कौन राधा है जरा तू ही बता
जो कन्हैया से करेगी प्रीति छल
चल हवा, उस ओर मेरे साथ चल।

मत फँसा सुख चक्र दुख की कील में, मत उठा तूफान दुख की झील में
हो सके तो रख नये जलते दिये, आस के बुझते हुए कंदील में
तू हवा है कर सुरभि का आचमन, छोड़कर अपने पुराने ये बसन
तू नए अहसास के कपड़े बदल
चल हवा, उस ओर मेरे साथ चल।

चल जहाँ तक बाँसुरी की धुन चले, फूल की खुशबू चले, गुनगुन चले
भीग जा तू प्रीति के हर रंग में साथ जब तक प्राण का फागुन चले
पूछ मत अब जा रहा हूँ मैं कहाँ
चल प्रतीक्षा में खड़े होंगे जहाँ
एक नीली झील, दो नीले कमल
चल हवा, उस ओर मेरे साथ चल।
चल हवा, उस ओर मेरे साथ चल, चल वहाँ तक जिस जगह मेरी प्रिया
गा रही होगी नई ताजा गजल, चल हवा, उस ओर मेरे साथ चल।
सुना है , डाली से जूदा होकर , पत्त्तियाँ कहीं की नहीं रहती 
तुम मुझको , अपने से जरा सोच कर जूदा करना

इच्छाओं का घर..कहाँ है?

इच्छाओं का घर--- कहाँ है? क्या है मेरा मन या मस्तिष्क या फिर मेरी सुप्त चेतना?

इच्छाएं हैं भरपूर, जोरदार और कुछ मजबूर. पर किसने दी हैं ये इच्छाएं?
क्या पिछले जनमों से चल कर आयीं या शायद फिर प्रभु ने ही हैं मन में समाईं?

पर क्यों हैं और क्या हैं ये इच्छाएं?

क्या इच्छाएं मार डालूँ? या फिर उन पर काबू पा लूं? और यदि हाँ तो भी क्यों?

जब प्रभु की कृपा से हैं मन में समाईं? तो फिर क्या है उनमें बुराई?
ये कौन सा अन्दाज़ है तेरी मोहब्बत का जरा मुझे भी समझा दो 
जो मरने से भी रोकती है और जीने भी नहीं देती

थक गया मैं करते-करते याद तुझको..


अपने होंठों पर सजाना चाहता हूँ, आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
कोई आँसू तेरे दामन पर गिराकर, बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ

थक गया मैं करते-करते याद तुझको, अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ
छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा, रोशनी हो, घर जलाना चाहता हूँ

आख़री हिचकी तेरे जाने पे आये, मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ
कमाल की फनकारी है तुझमें वार भी दिल पर , राज़ भी दिल पर 
ना रईश हुँ , ना अमीर हुँ , ना बादशाह , ना वज़ीर हुँ
तेरा इश्क है मेरी सल्तनत , उसी सल्तनत का मैं फकीर हुँ


कितनी बातें कितनी यादें..मन करता

झर जाते हैं शब्द हृदय में पंखुरियों-से
उन्हें समेटूँ, तुमको दे दूँ मन करता है 

गहरे नीले , नर्म गुलाबी , पीले , सुर्ख लाल ,
कितने ही रंग हृदय में झलक रहे हैं ,
उन्हें सजाकर तुम्हें दिखाऊँ मन करता है 

खुशबू की लहरें उठती हैं जल तरंग-सी
बजती है रागिनी हृदय में
उसे सुनूँ मैं साथ तुम्हारे मन करता है 

कितनी बातें कितनी यादें भाव-भरी होंठों तक आतीं
झर जाते हैं शब्द हृदय में पंखुरियों-से
उन्हें समेटूँ, तुमको देदूँ मन करता है !


23 June 2014

Yaad Hai Mujhe Wo Pehli Mulakat...












Yaad Hai Mujhe Wo Pehli Mulakat,
Jaise Ho Barsat Ki Koi Raat,

Wo Tera Dhire Se Muskurana,
Mujhe Dekh Ke Yun Nazarein Churana,

Phir Mujhe Dekh Ke Yun Andekha Kar Jana,
Yaad Hai Mujhe Wo Tera Kareeb Anaa,

Phir Mujhse Dheere Se Ye Keh Jana,
Kyon Karte Ho Mujhse Itna Pyar,

Aur Har Lamha Kyo Karte Ho Mera Hi Intezar,
Aur Phir Mera Yun Keh Jana,

Zindagi Se Apni Karta Hoon Main Pyaar,
Is Liye Karta Hoon Main Har Lamha Tera Hi Intezar

Kabhi Kwhabon me...!!!


♥ Zara Si Der Ko Sab Kuch,
Bhula Ke Dekh Lete Hain ♥
♥ Tujhe Hum Samne Apne,
Bitha Ke Dekh Lete Hain ♥
♥ Suna Hai MadhBhari Nazren,
Teri Pine Nahin Deti ♥
♥ Ijazat Ho To Hum Nazren,
Mila Ke Dekh Lete Hain ♥

♥ Woh Chehre Kaise Hote Hain?
Ki Jin Se Chand Sharmae ♥
♥ Tere Rukh Se Siyah Zulfein,
Hata Ke Dekh Lete Hain ♥

♥ Shama Ke Paas Ja Ke Kis Tarah?
Jalte Hain Parwane ♥
♥ Zara Hum Bhi Tere Nazdeek,
Aa Ke Dekh Lete Hain ♥
♥ Kahin Be'taab DiL Ko,
Iss Tarah Se Chain Aa Jaye ♥
♥ Teri Tasveer Ko DiL Se,
Laga Ke Dekh Lete Hain ♥


Khiyalon Main Tarasha Hai
Tera Peekar Bhi Ay Jana
Kabhi Khwabon Me Tujh Ko Bhi
Basa Ke Dekh Lete Hain ♥ 



21 June 2014

संदेश ,,,,,,,,,,,

पूजा की थाली लेकर साँझ सकारे हाथों में तुम चली
बिखर गयी अरुणाभा दीपक में चली हवा
साड़ी सरकी ’सर’ से दीपक भकुआया
कँपती लौ ने संदेश पठाया
तुमने चुपके से मुझे बुलाया ।

कंगन खनका हाथों में खन खन खन् न् न्
स्वर में, बह चली गंध गजरे की मन में
काँपी आँखें बन गई श्वास-प्रश्वास सरस सिहरन
मुख-चितवन ने संदेश पठाया
तुमने चुपके से मुझे बुलाया ।

पूर्ण चन्द्रमा-रात बैठकर मधुरिम स्वर तुमने गाया, पलकों से
चन्दा से ना जाने क्या बतियाया
मुग्ध हुआ क्षण-क्षण मन का यह आवारापन
झूमा बचपन-सा औ’ संदेश पठाया
तुमने चुपके से मुझे बुलाया ।

आँसू हैं उन्हें बह जाने दो

तुम्हारी आँख की कोर में जो सिमटे हुए आँसू हैं उन्हें बह जाने दो ।
तुम्हारा अहं विगलित हो जाएगा झूठ की धूल धुल जाएगी
दमकता सच उग आएगा तुम्हारे चेहरे पर ।
हर उस आँख में आँसू होते हैं जिनमें कभी सपने अँकुराते हैं।
मैंने ज़िन्दगी को जिस आँख से देखा है
उसमें दर्द के अलावा बेपनाह मुहब्बत के फूल भी हैं ।
कैसा ऐय्य्आर है प्यार जो एक आँख में दर्द बन कर टीसता है
दूसरी को मुहब्बत की फुलझड़ियों से चुँधियाता है!

"ज़िंदगी"

चाहे बाँचो, चाहे पकड़ो, चाहे भीगो ,
एक आवाज़ है बस दिल से सुनी जाती है 
कभी पन्ना, कभी खुशबू, कभी बादल ,
"ज़िंदगी" वक्त-सी टुकड़ों में उड़ी जाती है
कभी अहसास-सी बहती है नसों में हो कर ,
कभी उत्साह-सी उड़ती है हर एक चेहरे पर ,
कभी बिल्ली की तरह दुबकती है गोदी में ,
कभी तितली की तरह हर ओर उड़ा करती है ,
चाहे गा लो, चाहे रंग लो, चाहे बालो 
हर एक साँस में अनुरोध किए जाती है 
कभी कविता, कभी चित्रक, कभी दीपक ,
आस की शक्ल में सपनों को सिये जाती है ,
कभी खिलती है फूलों की तरह क्यारी में ,
कभी पत्तों की तरह यों ही झरा करती है ,
कभी पत्थर की तरह लगती है एक ठोकर-सी,
कभी साये की तरह साथ चला करती है ,
कभी सूरज, कभी बारिश, कभी सर्दी ,
आसमानों में कई रंग भरा करती है ,
कभी ये फूल, कभी पत्ता, कभी पत्थर !
हर किसी रूप में अपनी-सी लगा करती है !!

कब सुनोगे पुकार

पुकारती रही कोयल, तुम नहीं आए
उफनती रही नदिया, तुम नहीं आए
धीर-मौन रहा आकाश, तुम नहीं आए
चमकता रहा चाँद,
जलता रहा सूरज, तुम नहीं आए
रोते रहे बादल, तुम नहीं आए
रोज बाट जोहते रहे, तुम नहीं आए
तुम, जो द्रौपदी की एक पुकार पर दौड़े चले आए
कब सुनोगे पुकार
किसी एक की,
या
इन सबकी


20 June 2014

शब्दों में ही खोजूँगा

शब्दों में ही खोजूँगा और पाऊँगा तुम्हें 
वर्ण-वर्ण जोड़कर गढूँगा ,
बिल्कुल तुम्हारे जितना ही सुन्दर एक शब्द 
और आत्मा की संपूर्ण शक्ति भर , फूँक दूँगा निश्छल प्राण 
जीवंत कर तुम्हें , कवि हो जाऊँगा ,
ईश्वर हो जाऊँगा........
तुम्हारा प्यार बुरे दिनों में आई राहत की चिट्ठियाँ हैं 
तुम्हारा प्यार बसंत की गुनगुनी भोर में ,
किसी पेड़ की ओट से उठती कोयल की बेतरह कूक है 

तुम्हारा प्यार लहलहाती गर्मी में ,
एक गुड़ की डली के साथ एक ग्लास पानी है !!!

18 June 2014

बस तुम से शुरू और तुम पर खत्म ...मे

मैंने मोहब्बत भी तो तुमसे बेहिसाब की थी 
फिर क्या हुआ ग़र तुमने दर्द बेहिसाब दे दिया?
जोर चलता नहीं अब दिल पर मेरा , मेरे दिल पर अब आपकी हुकुमत हो गई 
कुछ और नहीं चाहते आपके सिवा , आपकी चाहत हमारी इबादत हो गई 

सबकुछ माँग लिया है , तुमको माँग कर 
उठे नहीं हैं हाथ मेरे , इस दुआ के बाद 

बड़ा मज़ा आता है तुम्हे , हमें सताने में 
चलो , हँसी तो आती है तुम्हारे होंठों पर इसी बहाने से
दोंनों ही भागीदार हैं बराबर इस जुर्म में
मैंने जब नज़र मिलायी तो मुस्कुराये तुम भी थे 

हमने देखा था तुझे शौक-ए-नज़र की खातिर 
ये ना मालूम था कि तुम दिल में उतर जाओगे 
इतना कीमती तो नहीं था मेरा चैन-ओ-सुकून 
लूट कर ले गये तुम जिसे अनमोल खजाने की तरह
मिन्नतें करती हुँ नीन्द से कि आ जाओ , पर नहीं आती 
फिर ऐसे ही तेरा ना आना याद आता है 
तुम्हारे साथ ही महसूस हुई थी 
उसके बाद मैंने कभी जिन्दगी को देखा ही नहीं
नमक-दान हाथ में लेकर , सितमग़र सोचते हो क्या ?
हज़ारों ज़ख्म हैं दिल पर , जहाँ चाहो छिड़क डालो
तुझे मैंने हक़ दिया है दिल्लगी का 
तू मेरे दिल से खेल जब तक मेरा दिल ना बहल जाये
तेरा दिया हर ग़म हर दर्द गवाँरा है मुझको 
बस एक बार कह दो , तुमने मुझे अपना मान लिया है
तेरी चाहत के चिरागों में यही खास बात है 
मद्धम तो हो जाते हैं पर बुझते नहीं हैं
उल्टी चाल चलते हैं तेरे चाहने वाले 
आँख बन्द करते हैं तेरे दीदार के लिए
कैसा सितम है ये आपका जो रोने भी नहीं देते 
करीब खुद आते नहीं और जूदा होने भी नहीं देते
जरा एक बात बताओ हमको 
दिल दुःखाने को क्या तुम्हे सिर्फ हम ही मिले
दो पल की थी जिन्दगी मेरी जो तेरे नाम कर दी 
एक पल तुझे चाहने में और एक पल तेरे इन्तजार में 

तुझे याद कर लूँ तो आ जाता है सुकून दिल को 
मेरे गमों का इलाज़ भी कितना सस्ता है
ख्वाईश नहीं मुझे मशहुर होने की 
तुम मुझे पहचान लो , बस इतना ही काफी है
एक बार हँस कर जो तुम मेरे हो जाओ .......रात कुछ यूँ बीते कि सवेरा हो जाये
मेरी जिन्दगी की किताब का हर पन्ना-पन्ना यूँ सज़ा हुआ 
सर-ए-इबत्दा , सर-ए-इन्तेहा , तेरा नाम दिल पर लिखा हुआ 
बस तुम से शुरू और तुम पर खत्म .......मेरा गुस्सा भी और मेरा प्यार भी 



  
 

16 June 2014

Kahi Khushi Kahi Gum

Mil jate hai kitno ko khushi,
Mit jate hai kitno ke gum,
Message isliye bhejte hai hum,
Taki na milne se bhi apni dosti na ho kam…

 
Kyun aapki khamoshi mujhe khamosh kar jati hai,
Kyun aapki udaashi mujhe udash kar jati hai,
Kya rishta hai mera aur aapka,
Jo har pal aapki yaad aa jati hai…

 
Gujarish hamari woh maan na sake,
Majburi hamari woh jaan na sake,
Kehte hai marne k baad bhi yaad rakhenge,
Jeete ji jo hamei pehchan na sake…

 
Kabhi hasa dete ho, kabhi rula dete ho,
Kabhi kabhi neend se jaga dete ho,
Magar jab bhi dil se yaad karte ho,
Kasam se zindagi ka ek pal badha dete ho…

 
Nazaron ko nazare ki kami nahi hoti,
Baharo ko phool ki kami nahi hoti,
Aap hamei kyun yaad karenge aap toh asman hai,
Aur asman ko sitaro ki kami nahi hoti…

 
Saari duniya ki muskan tere paas hai,
Yeh zamin aur asman tere paas hai,
Gam na karna ki tujhe yaad nahi karte,
Aye dost meri toh jaan tere paas hai…

 
 Tum banke dost aise aaye zindagi mei,
Ke hum yeh zamana hi bhul gaye,
Tumhe yaad aaye na aaye hamari kabhi,
Par hum toh tere bagair jeena hi bhul gaye…

 
Ek jasie dost sare nahi hote,
Kuch hamare ho kar hamare nahi hote,
Aap se dosti karne ke baad mehsus hua,
Kaun kehta hai “taare zamin par” nahi hote…

 
Takdir ne chaha, Takdir ne bataya,
Takdir ne aapko aur humko milaya,
Khushnasib the hum ya woh pal,
Jab aap jaisa anmol dost hamari zindagi mei aaye…

08 April 2014

मेरे घर में एक ही सुख है कि यहाँ

मेरे अपने दुख ने मुझे संसार भर का दुख दिया
इसके लिए उसने मुझे दिया भरा-पूरा मेरा संसार भी,

मेरा दुख कभी बौना न था
बचपन में ही उसने मुझे चंदा-मामा दिया, कभी टूटने वाला खिलौना नहीं दिया,
माँ के दुख ने मुझे इंसान बनाया पिता के दुख ने शैतान होने से रोका
पत्नी के दुख ने पैदा की मेरे भीतर एक बड़ी स्त्री
बदल दिया सुख का मापदण्ड, दुख ने मुझे कुछ भी कम नहीं दिया

बाज़ार जा रही एक लड़की की ऑंखों की चमक ने
उड़ेल दिया मुझ पर पूरे बाज़ार का दुःख,

एक हिन्दू के दुख ने खड़ा कर दिया मुझे मंदिर के मेले में अकेला,
मेरे खेतो में कभी पानी नहीं रुका, चारों ओर उपजे दुख ने
नहीं उठाने दी मुझे अपनी मेड़,

मेरे घर में एक ही सुख है कि यहाँ सबका दुख एक है
दुख ने घर में एक ही थाली दी और उस थाली पर
एक साथ बैठा कर मुझे दिये अनेक भाई ।